Wednesday, March 25, 2026
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बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज फर्म की चेतावनी, इन शेयरों में 21% तक गिरावट का अंदेशा


मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता से वैश्विक समेत घरेलू बाजार में भी हलचल देखने को मिल रही है. भारतीय शेयर मार्केट में लगातार 3 दिनों से गिरावट देखने को मिली. शुक्रवार के कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. सेंसेक्स 1470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,563.92 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत फिसलकर 23,151.10 के लेवल पर बंद हुए थे. बाजार के इस माहौल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. वहीं, ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कुछ कंपनियों को अपनी अंडरपरफॉर्म लिस्ट में शामिल किया है. आइए जानते है, इस बारे में…विप्रो को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने सावधानी बरतने की सलाह दी है. फर्म के मुताबिक कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर से गिरकर करीब 180 रुपये तक आ सकता है. जो बीएसई पर इसके पिछले बंद भाव 202.51 रुपये से लगभग 21 प्रतिशत कम है.ब्रोकरेज का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के मुख्य रेवेन्यू में लगातार दूसरे साल गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि परामर्श सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कमजोर बनी हुई है. सिप्ला को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने सतर्क रुख अपनाया है. उनके मुताबिक आने वाले समय में कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है. वजह यह है कि कंपनी की तीन प्रमुख दवाओं में से दो को कड़े प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. वहीं एक अहम दवा लैंरेओटाइड की सप्लाई सहयोगी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़ी दिक्कतों के कारण प्रभावित हो रही है.इन चुनौतियों के चलते ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत तक घट सकता है. इसी कारण फर्म ने इस शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है |

हुंडई मोटर इंडिया

हुंडई मोटर इंडिया को लेकर ब्रोकरेज हाउस जेफरीज का मानना है कि कंपनी शेयरों में तेजी की गुंजाइश कम है. ब्रोकरेज ने इसका टारगेट प्राइस करीब 1,900 रुपये रखा है, जो पिछले बंद भाव के लगभग बराबर है.हालांकि उनका कहना है कि जीएसटी में संभावित कटौती, बाजार में लिक्विडिटी की बेहतर स्थिति और सरकारी वेतन बढ़ोतरी जैसे कारणों से भारत में पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रह सकती है, लेकिन ऑटो सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है |

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